भारत में कोरोना का प्रभाव डॉ मनोज शर्मा
26 अप्रैल
2020.
आधुनिक विश्व में कोरोना नामक
महामारी चीन के वुहान शहर से पिछले साल नवम्बर-दिसंबर से फैलनी शुरू हुई थी, तब
किसी को भी पता नहीं था की ये महामारी इतना विकराल रूप ले लेगी। पहले तो चीन ने इस
वायरस के बारे में सटीक जानकारी दूसरे देशों से छुपाई फिर इसके एक व्यक्ति से
दूसरे तक संक्रमण की जानकारी भी छुपाई, तथा इस बीमारी से संक्रमित लोगों को पूरे
यूरोप में जाने दिया जिससे यह वायरस बहुत तेजी से पूरे विश्व में फैल गया। आज
विश्व में 2 लाख से ज्यादा लोग असमय ही काल
के गाल में समा गए हैं तो इसके पीछे चीन द्वारा की कई गलतियाँ ही जिम्मेदार
हैं। पूरा विश्व इस महामारी से लड़ रहा है, इसका कोई प्रभावी इलाज भी नहीं है। कई
देशों की अर्थव्ययस्था चरमरा गई हैं, कारोबार, व्यापार ठप्प पड़े हैं, लोगों के
रोजगार छिन गए हैं, कई देशों में भुखमरी के आसार बनने लगे हैं, इन सबके लिए कोई
जिम्मेदार है तो वह है चीन।
हमारे देश में सबसे पहला कोरोना का मामला जनवरी में सामने आया
था, तभी से इसपर नियंत्रण के प्रयास शुरू कर दिए गए थे, प्रधानमंत्री मोदी जी के
निर्देशन में सबसे पहले विदेशों से आने वाले यात्रियों की जांच शुरू कर दी गई थी,
फिर देश की जनता को सामूहिक रूप से जागृत किया गया लोगों का पूर्ण सहयोग मिलने से
देश में लोकडाउन लगाने में सरलता हुई। आज अगर देश में कोरोना वायरस से संक्रमित
मरीजों व मृतकों की संख्या नियंत्रण में है तो इसका श्रेय बहुत शुरू से लागू की गई
सावधानियाँ ही हैं। ऐसा न किया होता तो यहाँ की स्थिति अमेरिका, इटली, ब्रिटेन व
फ्रांस आदि देशों से भी भयावह होती। देश की आर्थिक स्तिथि के लिए अनेक प्रयास समय
समय पर किए गए, गरीब और मजदूर वर्ग के लिए राशन व नगदी के रूप में मदद के लिए हर
संभव कोशिश की गई। अब जबकि लोकड़ाऊन की अवधि पूरी होने वाली है तो देश की इकोनोमी
को पटरी पर लाने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं, धीरे धीरे छोटे और कुटीर उद्योगों
को खोलने की छूट दी जा रही है, देश के ग्रीन जोन में सीमित मात्रा में यातायात भी
खोला जा रहा है। ये सब कोशिशें सोशल दूरी बनाए रखते हुए कोरोना के संक्रमण को
सख्ती से रोकते हुए देश की आर्थिक स्थिति मे गति लाने के उद्देश्य से की जा रही है।
मोदी जी का मंत्र “जान भी और जहान भी”
बहुत ही उपयुक्त नीति मंत्र है, देश के हर नागरिक के जीवन की रक्षा तथा हर नागरिक
के धनोपार्जन की व्ययस्था सुनिश्चित करना इस समय शासन प्रशासन की महती जिम्मेदारी
है।
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